आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां : दूर करें हर समस्या
आयुर्वेद में स्वास्थ्य संबंधी
परेशानियों के इलाज मौजूद है। ऐसी चीजें जो हमारे आसपास ही हैं लेकिन हमें
उनके बारे में जानकारी नहीं है।
ऐसी आयुर्वेदिक
जड़ी-बूटियां जो आपको बिना किसी साइड इफेक्ट के स्वास्थ्य लाभ देंगी।
1. पुदीना-
पुदीने
की पत्तियां खून साफ करती हैं, सिरदर्द ठीक करती हैं, खराब गले को राहत
पहुंचाती हैं, उल्टियों को रोकती हैं और दांतों की दिक्कतों से भी निजात
दिलाती हैं। पुदीना ऐंटी-बैक्टीरियल भी होता है जो शरीर में बैक्टीरिया
पैदा होने से रोकता है।
2. हल्दी-
हल्दी का इस्तेमाल हम लगभग सभी हिन्दुस्तानी सब्जियों या खाद्य पदार्थों में
करते हैं। इसकी जड़ों और पत्तियों में औषधीय गुण होते हैं। इसमें सबसे
अच्छे ऐंटी-बैक्टीरियल गुण हैं। इससे जोड़ों के दर्द, आर्थराइटिस, पाचन
विकार, दिल और लिवर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता है। यहां तक कि यह
कैंसर सेलों को खत्म करती है और स्किन के लिए भी अच्छी होती है।
3.लेमन ग्रास-
यह
आमतौर पर उत्तर भारत में उगाया जाता है। इसे चाय में डालकर पीने का चलन
है। लेमन ग्रास शरीर, जोड़ों, सिर और मांसपेशियों के दर्द से निजात दिलाती
है और स्ट्रेस से भी बचाती है।
4. सफेद कमल-
सफेद
कमल की पत्तियां, फूल, बीज और जड़ों से हैजा, पेट की बीमारियों, कब्ज और
आंखों के इन्फेक्शन का इलाज किया जाता है। सफेद कमल के बीजों को भी
कामोत्तेजक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
5. गुलाब
गुलाब की पत्तियां खाने से दिल की सेहत बनती
है, सूजन घटती है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और ब्लड प्रेशर कम होता है।
गुलाब की पत्तियों से भी स्ट्रेस, मासिक पीड़ा, अपच और अनिद्रा से निजात
मिलती है।
6. मेहंदी की पत्तियां-
मेहंदी
की पत्तियां मूत्रवर्धक होती हैं। वे दर्द को कम करती हैं और शरीर को
डीटॉक्स करती हैं। कब्ज के इलाज में भी इनका इस्तेमाल हो सकता है। छाले,
अल्सर, चोट, बुखार, हैमरेज और मासिक दर्द से भी मेहंदी की पत्तियां छुटकारा
दिलाती हैं।
7. सब्जा-
सब्जा
को फालूदा में कूलिंग एजेंट के तौर पर डाला जाता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी
एसिड पाया जाता है। इनके सेवन से इम्युनिटी बढ़ती है, ब्लड प्रेशर कम होता
है और दिल की सेहत बनती है। इन्हें खाने से स्किन अच्छी होती है और सूजन घटती है।
8. दालचीनी-
भारतीय
मसालों में दालचीनी अहम है। इसके सेवन से दर्द कम होता है और अकड़न दूर
होती है। यह किडनी को डीटॉक्स करता है और सांस संबंधी दिक्कतें दूर कर ब्लड
सर्कुलेशन बढ़ाता है।
9. इसबगोल-
इसबगोल
की भूसी कब्ज का अचूक इलाज है। यह एक तरह की घुट्टी है जो आंतों को
रिलैक्स करती है। इसे पीसकर जोड़ों पर लगाने से जोड़ों के दर्द से भी आराम
मिलता है।
10. कपूर -
इस
पौधे के अनगिनत फायदे हैं। इसकी छाल से बैक्टीरिया और फंगस से निजात मिलती
है, दर्द से आराम मिलता है, यह कामोत्तेजक का भी काम करता है और मानसिक स्वास्थ्य को
बढ़ाता है। कपूर के तेल से खांसी, दमा, हिचकी, लिवर की दिक्कतों और दांत
के दर्द का इलाज किया जाता है। इसे मांसपेशियों या नसों का दर्द ठीक करने
और डिप्रेशन का इलाज करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
11. अदरक- फ्लू के मौसम और सर्दियों में अदरक सबका फेवरिट होता है।
अदरक उबकाई, सूजन और पाचन संबंधी दिक्कतों से निजात दिलाता है। इसका
इस्तेमाल कई घरेलू नुस्खों, खासकर सर्दी की बीमारियों को दूर करने वाले
नुस्खों में किया जाता है।
12. केसर- केसर को कामोत्तेजक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह
डिप्रेशन कम करता है, पाचन समस्याएं दूर करता है, मांसपेशियों की मरोड़,
ठंड, सिरदर्द और बवासीर का इलाज करने में काम आता है।
13. गुड़हल का फूल- यह सिरदर्द की औषधि है। इसमें नर्मी देने का गुण
होता है। इसलिए इस फूल की पत्तियों का पेस्ट बनाकर कैंसर संबंधी सूजन पर
लगाया जाता है ताकि आराम मिले।
14. अरंडी- अरंडी त्वचा और बालों के लिए काफी लाभकारी होता है। इसकी
पत्तियों से निकलने वाले पदार्थ से सिरदर्द, गठिया, दाद और कब्ज का इलाज
किया जाता है।
15. काली मिर्च- काली मिर्च की छाल पेट के कीड़े, पाचन की दिक्कतें,
सिरदर्द, कब्ज, खराब गला, अल्सर, दांत दर्द आदि का इलाज करने के काम आती
है।
जड़ी-बूटियां- बहुत गुणकारी औषधि है मुलहठी
एक बहुत ही उपयोगी एवं
सुपरिचित जड़ी है मुलहठी, जिसे अन्य बोलचाल में मुलेठी भी कहते हैं। यह दो
वर्ष तक खराब नहीं होती और विभिन्न नुस्खों में औषधि के रूप में प्रयोग की
जाती है।
यह
मधुर और शीतवीर्य होती है तथा किसी भी मौसम में प्रयोग की जा सकती है।
इसका सत भी बनाया जाता है, जिसे सत मुलेठी या रुब्बे सूस कहते हैं।
मुलहठी- इसका
पौधा 6 फीट तक ऊंचा होता है। यूं तो यह भारत के जम्मू-कश्मीर और देहरादून
में पैदा होती है फिर भी ज्यादातर विदेशों से आयात की जाती है। इस पौधे की
जड़ बहुत मीठी होती है। इसकी जड़ और काण्ड (तना) को ही अधिकतर प्रयोग में
लिया जाता है। यह लकड़ी जैसी होती है और इसका टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से
मीठा लगता है।
मूलहठी के गुण-
यह
शीतल, शीतवीर्य, भारी, स्वादिष्ट, नेत्रों के लिए हितकारी, बल तथा वर्ण के
लिए उत्तम, स्निग्ध, वीर्यवर्द्धक, केशों तथा स्वर के लिए गुणकारी है। यह
पित्त, वात एवं रुधिर विकार, व्रण, शोथ, विष, वमन, तृषा, ग्लानि तथा क्षय
को नष्ट करने वाली है। नेत्रों के लिए फायदेमन्द, त्रिदोषनाशक और घाव को
भरने वाली है।
उपयोग- इसका
उपयोग औषधियों में, मीठे जुलाब में, मीठी गोली, खांसी की गोली,
बलवीर्यवर्द्धक नुस्खों में प्रायः होता ही है। आयुर्वेदिक योग मधुयष्टादि
चूर्ण, यष्टादि क्वाथ, यष्टी मध्वादि तेल में इसका उपयोग होता है। इसे
मुंह में रखकर चूसने से कफ आसानी से निकल जाता है, खांसी में आराम होता
है, गले की खराश और स्वरभंग में लाभ होता है।
मुलहठी के विभिन्न भाषाओं में नाम-
संस्कृत-
यष्टीमधु। हिन्दी- मुलहठी, मुलेठी। मराठी- ज्येष्ठीमध। गुजराती- जेठीमध।
बंगाली- यष्टीमधु। तेलुगू- यष्ठीमधुकम। तमिल- अतिमधुरम। फारसी- वेख महक।
इंग्लिश- लिकोरिस। लैटिन- ग्लिसीराइजा ग्लेब्रा।
रासायनिक संघटन-
इसमें
एक प्रमुख तत्व ग्लिसीराइजिन पाया जाता है जो ग्लिसीराजिक एसिड के रूप में
रहता है। यह शकर से 50 गुना मीठा होता है। इसमें एक स्टिरॉयड इस्ट्रोजन
भी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त ग्लूकोज, सुक्रोज, मैनाइट, स्टार्च,
ऐस्पैरेजिन, तिक्त पदार्थ, राल, एक प्रकार का उड़नशील तेल और एक रंजक तत्व
पाया जाता है।
हरी-हरी पत्तियां, सेहत की सखियां
नीम- नीम की 10-12 पत्तियों को पीसकर सुबह खाली पेट पीने से गर्मी की घमौरियों व
चर्मरोग का शमन होता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर सिर धोने से
बाल झड़ना रुक जाता है व जुएँ, लीख मर जाते हैं।
तुलसी- तुलसी
के 8-10 पत्तों को पीसकर चीनी में मिलाकर पीने से लू नहीं लगती है। अगर लू
लग गई है तो आराम मिल जाता है। रोज प्रातः खाली पेट तुलसी के चार पत्ते
नियमित खाने से बीमारी नहीं होती है।
बबूल-बबूल की पत्तियों को उबालकर उस पानी को कुल्ला करने से दाँत व मसूड़े मजबूत
होते हैं। बबूल की पत्तियों का रस निकालकर सरसों के तेल में मिलाकर लगाने
से गर्मी के फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है।
बड़- बड़ के दूध में एक नींबू का रस मिलाकर सिर में आधे घंटे तक लगा रहने दें।
फिर सिर को गुनगुने पानी से धो लें। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है व
बाल तेजी से बढ़ते हैं।
बेर-
बेर की पत्तियों व नीम की पत्तियों को बारीक पीसकर उसमें नींबू का रस
मिलाकर बालों में लगा लें व दो घंटे बाद बालों को धो लें। इसका एक माह तक
प्रयोग करने से नए बाल उग आते हैं व बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।
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